दिखाती हैं नखरे, दिखाती हैं अदाएँ,
लड़कों को अपने पीछे घुमाएँ
मगर आयें पीछे तो दूर भगाती हैं
दीवानी ख़ुद हैं और हमें दीवाना बताती हैं!
पहने कपड़े सेक्सी सेक्सी, फिर स्टाइल में चलती हैं
दिखाने को importance अपनी, हर पल अदाएँ बदलती हैं
देख के अदाएँ सीटी बजायें हम जो, लफंगा हमें बताती हैं
दीवानी ख़ुद हैं और हमें दीवाना बताती हैं!
पहनें sandle हील की ऊँचे, ख़ुद नागिन सी लहरायें,
देख के सेक्सी पतली टांगें लम्बी, जो कोई पीछे आए,
कभी कभी तो पब्लिक में ही, पब्लिक से पिटवाती हैं,
दीवानी ख़ुद हैं और हमें दीवाना बताती हैं!
काले काले नैना इनके, नजरें हैं मतवाली,
लगे इन्ही में है दुनिया सारी, जब तक न बने ये घरवाली,
फिर घरवाली बन के सुबह शाम ये, हमको यूँ सताती हैं,
जान बूझ के फंस जाते हैं हम, ये ऐसा हमें घुमाती हैं,
दीवाना बनाती हैं ख़ुद हमें और दीवाना हमें बताती हैं
और जब लिख दें ये जब ब्लॉग पर तो हम पर खूब चिल्लाती हैं,
दीवानी ख़ुद है और हमें दीवाना बताती हैं!
Showing posts with label व्यंग्य. Show all posts
Showing posts with label व्यंग्य. Show all posts
Saturday, May 03, 2008
Subscribe to:
Posts (Atom)